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ढूंढता हूं मैं तुझे

Bharat SinghBharat Singh May 16, 2022
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ढूंढता हूँ मैं तुझे 

सावन की हर बरसात में

बिना तेरे तो सावन भी 

जेठ की दुपहरी सा

सुनता हूं मैं तुझे 

कोयल की हर कूक में 

बिना तेरे तो कोयल भी

कौवे जैसी लगती है


ढूंढता हूं मैं तुझे 

बसंत के हर मौसम में

ढूंढता हूं मैं तुझे गुलाब 

के हर फूल में

बिन तेरे ओ बेदर्दी 

फूल भी कांटे 

जैसा चुभता है 

घर में वह झूला हमारा 

बिन तेरे वह रोता है

ढूंढता हूं मैं तुझे 

बसंत के हर मौसम में

बिन तेरे ओ बेदर्दी 

बसंत भी पतझड़ जैसा लगता है


ठिठुर जाता हूं बिन तेरे

सर्दी वाली रात में

ढूंढता हूं मैं तुझे 

बदली हर करवट में

बिन तेरे ओ बेदर्दी 

रात भी नहीं कटती है

छोटी सी आहट से 

मैं जाग जाता हूं

दौड़ कर फिर तुम्हें खोजने

दरवाजे तक जाता हूं

प्यार में तेरे

मैं दीवाना हो गया

ढूंढता हूँ मैं तुझे 

सर्दी वाली रात में

ढूंढता हूँ मैं तुझे

सावन की हर बरसात में

~भरत सिंह


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