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आजा हम एक हो जाएं

Bharat SinghBharat Singh August 30, 2022
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मेरी कविता
कहो ना प्यार है 
मेरी हो तुम..
मैं शायर हूं तुम्हारा 
तुम शायरी मेरी
अरे बोल दे ना.. क्या जाता है तेरा 
मेरी तो जान जाती है तुम बिन
अरे बोल दे पगली 
मेरी हो तुम
तुम बिन लिखा ना जाए
तुम बिन जिया ना जाए
तुम बिन खाया ना जाए
तुम बिन रहा ना जाए
तुम खून बनकर 
मेरी नसों में बहने लगी हो 
तुम दिल मेरा बनके 
मुझमें  ही धड़कने लगी हो 
कैसे मैं तुम्हारे बिना जिऊंगा 
कैसे रहोगी तुम मेरे बिना 
तुम मछली मेरी मैं समंदर तेरा
समा जा मुझमें 
तड़प जाओगी मेरे बिना 
आजा हम एक हो जाएं 
ईश्वर के करीब हो जाएं 

मैं प्यार करना चाहता हूं तुमसे
मैं ख्याल रखना चाहता हूं तुम्हारा 
दूर मत होना मेरी आंखों के सामने से 
मेरी जान जाती है..तेरे जाने से
तेरा क्या जाता है 
अरे कहदे पगली प्यार है 
हम दो आत्माएं
ईश्वर ने हमें एक दूजे के लिए बनाया है 
अधूरा हूं मैं तुम बिन 
आजा हम एक हो जाएं 
ईश्वर के करीब हो जाएं
  ~भरत सिंह


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