मजबूरियों का फायदा's image
Poetry PagesPoetry1 min read

मजबूरियों का फायदा

Bechain SinghBechain Singh December 10, 2022
Share0 Bookmarks 28 Reads1 Likes


1) न उठाओ मेरी मजबूरियों का फायदा, 

"बेचैन" मजबूर हूँ मैं कोई मुर्दा तो नहीं हूँ|


2) जिन्दा था तो कहते थे साथ रहना मुश्किल है, 

मरते ही रोते हैं कि तुम बिन जिएंगे कैसे|

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts