जीवन की सच्चाई's image
Poetry PagesPoetry2 min read

जीवन की सच्चाई

Bechain SinghBechain Singh October 23, 2022
Share0 Bookmarks 25 Reads1 Likes

जीवन बहुत आसान था, जब बचपन का दौर था,

मस्त जिन्दगी थी अपनी, जब कमाता कोई और था,


बड़े हुए जब ठोकर खाई, तब हमने यह जाना है,

ईंसा का ईंसा दुश्मन है, मुश्किल बड़ा कमाना है,


अपने ही धोखा देते हैं, औरों की क्या बात करें,

नहीं परवाह है किसी को आप जिएं या आप मरें,


गिरना, संभलना और संघर्ष यही जीवन की रीत है,

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत है|


मात- पिता का हाथ है सिर पर तब तक जीवन में प्यार है,

छूटा साथ हुए अनाथ तो जीवन दुश्वार है,


मतलब के सब रिश्ते निकले, सच्चाई का वार हुआ,

जब तक सब कुछ ठीक चल रहा, सारे रिश्ते अपने हैं,


जीवन में जब आई मुसीबत, आप अकेले हो जाते हैं,

कहते थे जो हम साथ हैं, जाने कहाँ खो जाते हैं,


अकेले ही लड़ना पड़ती है आप को अपनी लड़ाई,

साथ देते हैं सच्चे मित्र, आत्मविश्वास और पढ़ाई,


मिली सफलता जो जीवन में, जीवन की सच्चाई,

साथ मिलेगा फिर अपनों का, दुश्मन करें बड़ाई |

"बेचैन"

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts