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Kumar VishwasPoetry1 min read

घर से निकले हैं, रावण।

Azad kaviAzad kavi December 12, 2021
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घर से निकले हैं रावण,

रावण जलाने आए हैं

घर की सीता पर कई उठाकर हाथ ,तो कई पुरुषार्थ दिखाकर आए हैं ।

मां सीता के ये बच्चे रावण जलाने आए हैं।

।।।

सीता विमुख नारे ,जय श्री राम लगाने आए हैं ।

हृदय में रावण ,मुख पर राम , ये रावन जलाने आए हैं।

।।

पितृ_मोह धृतराष्ट्र सा, ये खुद को दशरथ समझते हैं। बचपन के ये सब दुर्योधन खुद को राम समझते हैं

झोंक मिर्च आंखों में यह क्या दिखाने आए हैं ।

घर से, ये सारे रावण , रावण जलाने आए हैं।

।।।

धर्म_परायण रावण सारे हमको धर्म सिखानेआए हैं।

ये कर्तव्य_परायण रावण सारे घर में राम दफना कर आए हैं।

ये अहंकारी रावण सारे यहां सिर्फ राम जलाने आए हैं।

।।।

कितने शरीफ हो तुम झांको, खुद के अस्तित्व को तुम भांपो ।

लिखा क्या लिखा हुआ ह्रदय में,

इस लिपि को तुम बांचो।

ये रावण है या तुम हो ,इस बात को अब जानो।।

घर से निकले हैं......................... आजाद कवि जतिन।

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