फरवरी's image
Share0 Bookmarks 59 Reads0 Likes
मैं – पतझड़ अपूर्ण क्यूं रह जाता हैं ?

वो – क्योंकि वो प्रेम का सबसे अमुलय भाग अपने साथ लाता हैं ।

मैं – कोनसा ?

वो – त्याग का ।

मैं – पर त्याग तो फरबरी ने भी किया  हैं अपने हिस्से के दिनों को ..

वो – उसने केवल दिन त्यागा हैं किंतु पतझड़ ने , पतझड़ ने तो अपना सब कुछ त्यागा हैं , पतझड़ ने अपने भीतरी भाव के बोल को नग्न करके वसंत को सोपा हैं ।

मैं – तब तो अत्यधिक प्रेम वसंत के हिस्से आया और विरह पतझड़ के ?

वो – हां , पर इस बात पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकती ....

मैं – क्यूं ? 

वो – मुझे तो सदेव प्रेम मिला हैं वसंत के भाती 

मैं – तो तुमने अपने हिस्से का प्रेम कभी दिया नही उन प्रेमियों को ?

वो – दिया ना , अपने हिस्से का प्रेम मैंने दिया हैं उन्हें , पर  ....

मैं – पर सम्पूर्ण हृदय से नहीं दिया यही न ?

वो – क्या कहूं इस पर , मेरी सभी बात व्यर्थ जाएगी !

मैं – फिर भी ?

वो – “ दिन फरवरी ने ज्यों काटे हैं ,
     वो प्रेमियों ने गुलाब को बाटें हैं । "

मैं – निशब्द और भाव हीन हो  शून्य हो गया 

वो – क्या हुआ ?

मैं – शायद समझ आया की पतझड़ का त्याग क्यूं वसंत के हृदय पर अपनी प्रीत छोर जाता हैं ।

            – अविनाश जोशी ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts