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असंभव से संभव तक

avdhesh.indianavdhesh.indian May 7, 2022
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असंभव से संभव तक

क्यों बैठा है सहम कर

क्याक्यों बैठा है सहम कर

क्या हार से डरता है,

क्या बिना लड़े ही अपनी

हार स्वीकार करता है।

राह की मुश्किलों से

क्यों चलने से डरता है,

कौन आज तक अपने

प्रगति में व्यवधान करता है।

बाधाओं विघ्नों पर विजय के

क्या विश्वास से डरता है,

सपने सजोए है तूने

साकार करने से डरता है।

हौसलों से जो बढ़ा है

वह जहान बदल सकता है।

बस साध ले तू एक लक्ष्य

हर काम बना सकता है,

असंभव को संभव कर

दुनिया को दिखला सकता है ।


अवधेश कुमार की कलम से


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