मोरे प्यारे सजन's image
Love PoetryPoetry3 min read

मोरे प्यारे सजन

Atul VermaAtul Verma March 15, 2022
Share0 Bookmarks 51 Reads0 Likes

 मोरे प्यारे सजन

 मोरे प्यारे सजन 

 तुम ना आए अगर इस दिसंबर में घर 

 मर ही जाएंगे हम तकते तकते डगर

 मोरे प्यारे सजन 

 मोरे प्यारे सजन 

 खुब बहाना बनाते हो प्यारे सजन 

 लौट आओ अब घर को हमारे सजन

 सब पता है कहाँ चल रहा तुम्हरो मन

 कर किनारा ई कर लो जवानी खत्म 

 कुछ तो बाकी रखो अब हया और शरम

 मोरे प्यारे सजन 

 मेरे प्यारे सजन 

 एक सूची हमें उन चुड़ैलों की दो

 हमको मालूम है वो होंगी कम से कम सौ

 इतना दुखता है मन हरकतों से तुम्हारी   

 सोंचती इतनी उम्र तुम्हरे संग क्यूँ गुजारी 

 हम अकेले इधर गांव में बेखबर 

 तुम मजे कर रहे हो शहर दर शहर

 मोरे प्यारे सजन 

 मोरे प्यारे सजन 

कुछ ही दिन में नया साल आ जाएगा 

और फागुन फिर सर पे छा जाएगा 

आम के बौर आएंगे बागों में जब 

लड़कियां गीत गाएंगे फागुन में सब 

आंसुओं में मेरी आंखें डूबने तब

याद आएंगी उन रातों की घड़ियाँ सब

जिनमें हम रूठते तुम मनाते सजन

गीत यौवन के तुम....गुनगुनाते सजन

लब से लब चूमते जिस्म से जूझते 

देखते सब अंधेरे, पूरे होते सपन 

मोरे प्यारे सजन

मोरे प्यारे सजन 

होली में जब सहेलीं ठिठोली करें 

रंगों से एक दूजे की चोली भरें

एक हम तुम्हरी यादों में जल जल मरे 

एक साजन हमारे दुनियाभर में फिरें

है तुम्हरे रंगों की  सौगंध सजन 

गर ना रंग पाए तुमको तो मर जाएंगे हम 

मोरे प्यारे सजन

मोरे प्यारे सजन 

हर दफा अपने ऑफिस में उलझे रहते

जब जरूरत लगे प्यार खूब, परसते 

अबकी आओ दिखाऊं तुम्हें अपना रंग

 कितनी भी कोशिश कर लें, कुछ ना कहें 

पर तुम्हारी कहाँ रहती हरकतें भी कम

मोरे प्यारे सजन 

मोरे प्यारे सजन

भंवरी से पहले कितने सीधे थे तुम 

रात दिन बस हमारी ही बातों में गुम

क्या हुआ क्यूँ हुई है लगन हमसे कम 

लग रहा है तुम्हारा कहीं और मन 

मोरे प्यारे सजन 

मोरे प्यारे सजन

ई रजाई पलंग बिस्तरों की चुभन 

लगता है सब तुम्हारे बिना ये कफन

करवटो से हुई दुश्मनी जा रही

कुछ तो कर लो अजी अब मुझपे रहम

मोरे प्यारे सजन

मोरे प्यारे सजन 

फोन पर क्यूँ नहीं बोलते हो तुम कुछ

दूर मुझसे हो फिर भी हो कितने तुम खुश 

क्या हमीं ये निभाएं सारी कसमें

क्या हमीं करते बैठे आंखें नम 

मोरे प्यारे सजन

मोरे प्यारे सजन

जेठ की हरकतों का ठिकाना नहीं

तपता ऐसे है कि जैसे तुमको आना नहीं

ये जुलम सब अकेले हम कैसे सहें

बिन तुम्हारे यहाँ हम कैसे रहें

लौट आओ भर दो मन के जख्म 

मोरे प्यारे सजन

मोरे प्यारे सजन 

सब्र की सीमा की कोई सीमा नहीं

अब तुम्हारे बिना मुझको जीना नहीं

 तुम रहो खुश जहाँ भी रहो जी सजन

 तुम हमारे रहोगे सातों जनम

 मोरे प्यारे सजन 

 मोरे प्यारे सजन..... 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts