अंतिम यात्रा's image
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महबूब नहीं तो मौत ही सही, मैं उसके ख़्वाबों में दफ़्न होना चाहता हूँ,
तुम न आओगी मेरी क़ब्र पे है यक़ीन मुझको, बस इक दफ़ा तेरी गोद में सोना चाहता हूँ,
कर लिया पूरा सफ़र बिन हमसफ़र, मैं अपने मंज़िल पर अकेले निकलना चाहता हूँ,
न होंगे कोई और पड़ाव इस प्रक्रिया के मध्य, अब गमन अंतिम यात्रा पर करना चाहता हूँ।

#क़लम✍

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