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जब विश्वास पर आस्था भारी हो,
जब हर कही बेकारी व लाचारी हो,
मुफलिसी मे ज़िन्दगी गुजारी हो,
गाली-गलौज जनहित मे जारी हो,
आतंक और खौफ की छाई महामारी हो,
समझना जैसे वक्त के बदलने की तैयारी हो।
Ashutosh gautam 

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