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कुर्बानी मोहब्बत की

ashish.kumarmomashish.kumarmom October 7, 2021
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कुर्बानी मोहब्बत की


दे दी कुर्बानी जब मोहब्बत की 

मोहब्बत को मोहब्बत के लिए


हुई जब मोहब्बत, मोहब्बत की 

दिल में प्रचण्ड डाह होने लगी 


सोचा था दूर जाके उससे 

एक दिन तो जायेगे भूल


करी लाख कोसिस मगर 

किश्मत को न था मंजूर


अरमा ज्वाले से दीप्त हुए 

सपने सभी विलुप्त हुए


चाह कर भी न मिटी 

याद जो वो आती रही 


न छूट सकी यादो यह गठरी 

जुड़ता रहा जड़ प्रीत का बंधन


होने लगा प्रदीप्त अब तो

साथ ही ले जायेगा चन्दन

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