किसान आंदोलन's image
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राज्य नर्प जो गर मातम ध्वनि सुन न पाये 

उस राज्य प्रजा तब मूकबधिर बन जाय  


खेत मे जो भी उपजे उसको ही वो खाय 

नर्प कह दुगनी आय को कभी न अपनाय 


न मिले निवाला गर तो सरकंडे भख खाय 

जो बीत रही हो उनपर नर्प को न बतलाय 


मिले फ्री सिलेंडर गर , न धुआ रहित हो जाय 

पके भले सरकंडे पर निवाला मुख तो जाय


ड़ीजल खाद के दाम नर्प एसलिये दिये बढाय 

उपजे फसले बेच बिचौले फिर ऊचे दाम पे पाय 


किसलिये आंदोलन जब नर्प ने ही कानून बनाय 

ध्वनिमातम जो सुन पाये आंदोलन ध्वनि कहाँ सुहाय 


लाहडू बैल छाड़ि किसानो क्यो कारय चित सजाय 

धरने पर गर अडे रहे तुम तो कारय से कुचले जाय

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