जल रहा था बेजान दिल's image
Romantic PoetryPoetry1 min read

जल रहा था बेजान दिल

Arti GiriArti Giri January 29, 2022
Share0 Bookmarks 62 Reads1 Likes

जल रहा था बेजान दिल

तेरे हसरतों के दिये में

उस हवा के झोंके ने

एक आग सा लगा दिया

छूके तेरी खूशबू को

मेरे सांसों तक पहुंचा गया।


- आरती गिरि

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts