तब जनवरी आती है!'s image
Poetry1 min read

तब जनवरी आती है!

trishaatrishaa January 4, 2023
Share0 Bookmarks 51 Reads1 Likes
बन ज्वाला तब जनवरी आती है,
फरवरी भी इतराती है,
मार्च में सब तय होता है,
अप्रैल में जो भी होता है।

मई ही फिर सिखलाती है,
जुनूं-ए-जून में दिल बहलाती है,
जुलाई ही भाती है मन को,

अगस्त परिणाम बन आता है,
सिंतबर सब डर झुठलाता है,
अक्टूबर बन कर एक वरदान,
नवम्बर ओढ़ तीर कमान,
दिसंबर बदन काँपाता है।

-अरशा त्रिपाठी (त्रिशा)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts