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प्रश्न मेरा लाज़मी है देश की सरकार से - अनुराग अंकुर की इंकलाबी कविता

Anurag AnkurAnurag Ankur November 28, 2022
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शांति का संदेश देने के लिए आया नहीं
झूठ का जयघोष करने के लिए आया नहीं
क्यों घुट रहा है लोकतंत्र इस जहाँ में चीखकर
मैं यहाँ उपदेश देने के लिए आया नहीं
कितने कट और मर रहे हैं रेल और रोजगार से
प्रश्न मेरा लाज़मी है देश की सरकार से।

क्यों यहाँ इंसान डरता है किसी इंसान से
अब कोई उस्मान डरता क्यों किसी हनुमान से
गंगा और जमुना की धारा वाली इस तहज़ीब में
क्यों कोई भी राम डरता है किसी रहमान से
मज़हबी उन्माद वाले चोर ठेकेदार से
प्रश्न मेरा लाज़मी है देश की सरकार से। 

हर तरफ फैला हुआ बस झूठ का व्यापार है
झूठ ही है कीर्ति सारी, झूठ शिष्टाचार है
दृष्टि सबकी बिक चुकी हैं झूठ के बाजार में
शक्तियों के शीर्ष पर अंधों का पहरेदार है
हिटलरी गुमान वाले अंधे पहरेदार से
प्रश्न मेरा लाज़मी है देश की सरकार से।

मुझको भी क्या पड़ी मैं चीखूं और इस पर ज्ञान दूँ इस विषय पर शोध कर व्यापक कोई ब्याखान दूँ
मैं भी कहीं कोने में चादर डाल कर सो जाऊंगा
हाँ, हूं मै अंधा और बहरा मान कर सो जाऊंगा
ऐसे अंधों और बहरों से भरे दरबार से
प्रश्न मेरा लाज़मी है देश की सरकार से।  

~ अनुराग अंकुर 

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