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Peace PoetryPoetry1 min read

चिंता की चादर

AnupamAnupam October 28, 2021
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"मैं चिंता की चादर ओढ़े 
चारपाई पर लेट गया 
हवाएँ रात भर 
थपकियाँ देती रही मुझे 
मेरी माँ के जैसे"

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