जख्म's image
Share0 Bookmarks 56 Reads0 Likes

वो जिसे तूने आंसू समझ नजरंदाज किया 

वो तेरे दिए जख्मों से टपकता लहू था


वो चीख जिसने तेरी रूह को परेशान किया

वो मेरी गलती नहीं तुमने ही जख्मों पर पैर रखा


 वो चराग जो तूने दिन के उजाले में फेंक दिया

 वो कैसे अब तुझे रात के अंधेरे में मिलेगा

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts