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हर एक साल यूँ निकलता जा रहा है!

Annu palAnnu pal October 12, 2021
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वो ख्वाबों के परिंदे जिनको आज़ाद किया था हमने,
वो आज रास्ते भटक से गए है।
हम दोनों की ख़्वाहिश पर धूल सी चादर पडी है,मानो किसी ने संदूक में dafn कर दिया हो जेसे
हर एक साल यूँ निकालता जा रहा है!
हालात कुछ ऐसे है हम मिल नहीं सकते
यहां तन्हाई का आलम और बेचैनी के सहारे दिन निकालता जा रहा है,
काश! तुम रहते पास तो
ये घायल इंसान की रूह को पन्ना मिल जाती
तुम्हारे हाथो से लिखे खत को पढ़कर
आज फिर ये दिल टूटा जा रहा है!
हर एक साल यूँ निकलता जा रहा है!
एक साल ऐसा भी जिससे तुम मेरे पास हो
मैं झुठला दूँ उन लोगों को ,जिनके लिए तुम पागल थे
हर एक साल यूँ निकलता जा रहा है
हमारी मुलाकात का सिलसिला बढ़ता चला गया ,दुनिया भी मिली मुझसे ,पर तुम्हारे आने की खबर तक नहीं,
चाहा था ये करेंगे ,सोचा था वो करेंगे
तुमसे बिन मिले हर शाम ढलता जा रहा है,
हर एक साल यूँ निकलता जा रहा है!

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