ग़ज़ल: तेरे मेरे बीच कैसा ये मंजर बन गया's image
Love PoetryPoetry1 min read

ग़ज़ल: तेरे मेरे बीच कैसा ये मंजर बन गया

ankur gupta "ruhsafir"ankur gupta "ruhsafir" October 6, 2021
Share0 Bookmarks 16 Reads0 Likes

तेरे मेरे बीच कैसा ये मंजर बन गया

जैसे बिना ईंट पत्थर के घर बन गया

एहसासों की दीवारें सुकून की छत है

यादों का आँगन इबादत का दर बन गया

 

मीठे सपनो ने नींद से दोस्ती कर ली

बेफ़िक्री सिरहाना यक़ीं बिस्तर बन गया

 

नज़र बदन पर निशान छोड़ जाती है

आँखों की छुअन में ये असर बन गया

 

रोज़ डूबना उभरना कभी गहराई कभी किनारे

लहरों सी बातें ख़यालों का समन्दर बन गया

 

खामोशी जैसे दोनो के सिवा कोई नहीं

और गुफ़्तगू हुई तो पूरा शहर बन गया

 

ख़ुदा राज़ी है हमसे ये उसकी ही रज़ा है

मोहब्बत पर भरोसा इस क़दर बन गया


Dr Ankur Gupta “Ruhsafir”

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts