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ज़िंदगी एक तिलिस्म ही तो है।

Ankit KannaujiaAnkit Kannaujia November 3, 2021
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ज़िंदगी एक तिलिस्म ही तो है

जो जल रहा वो जिस्म ही तो है


दिखाना सबको है जिंदा होकर

जिंदा रहना एक रस्म ही तो है


खाता है वो हर वक़्त झूठी क़सम मेरी

तोड़कर कहता है क़सम ही तो है


है कोई शर्म नही बचा अब उसमें

ज़ख्म देकर कहता है ज़ख्म ही तो है।

            - अंकित कन्नौजिया














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