जाता हुआ सावन।'s image
Love PoetryPoetry1 min read

जाता हुआ सावन।

Anil jaswalAnil jaswal August 27, 2021
Share0 Bookmarks 27 Reads0 Likes

सावन भी धीरे धीरे,

भूतकाल हो गया,

हर रोज उसके इंतजार में,

निकल गया,

कभी आएगी वो,

बतयाएगी वो।


लेकिन ये सपना ही रह गया,

वो नहीं आई,

उसकी याद,

हर दम दिमाग में छाई,

उसका उठना बैठना,

बात करने का लैहजा,

रहा पुरी तरह हावी,

लगता है,

जिंदगी यूं ही कटेगी।


वो कैसी महबूबा,

जिसने कभी अपना,

पांव नहीं धरा,

बस एक सोच दे देती,

मुझे उसमें व्यस्त कर देती,

न उसे मेरी परवाह,

न कोई फ़िक्र,

एक मैं ही,

जो उसके बिना,

रहता विचलित।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts