हर याद....'s image
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हर याद जिसमें तुम हो ...
एक मुलाकात सी लगती है..
अब तो हवा भी गुज़रती है जब नजदीक से...
कानों  में तुम्हारी बात सी लगती है...

हम छुए नहीं हैं अब तक लबों से जिसे
उनका  बाहों में गिरना और गिर कर पिघलना बाक़ी है
यूं जो सिमट गए हैं जिस्म पर चादर की तरह
जूड़ गए हैं जैसे 'हिन्दोसता' थे
इनका भी 'पाकिस्तां' बन बिखरना बाक़ी है...

क्या कहते हो ...?

बेमतलबी थीं वो सारी बातें , वादें और मुलाक़ातें...?
या ख़ुदा ..
      अब तो हर घड़ी..क़यामत की रात सी लगती है....



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