जुदाई का दर्द's image
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बजाते थे साज और गुनगुनाते थे गीत हर महफ़िल में,

पर ज़ख़्मों से निकली आह का कोई तराना तो नहीं था।


दिल का दर्द छिपाकर लगाते थे नकली हँसी के ठहाके,

पर आँखों से बहते आँसूओं का कोई फ़साना तो नही था।


तुम्हे भुलाने की लाख कोशिशें सब हो गयी बेकार,

गम-ग़लत करने के लिए पास कोई मयखाना तो नही था।


काट दी अपनी सारी जिंदगी बस तुम्हारे इंतज़ार में,

मौत के साथ भी अपना कोई इकरारनामा तो नही था।


~ अम्बुज गर्ग

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