जख़्म बने नासूर's image
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एक दो इश्क में नाकाम हो तो चलता है मगर

बार-बार टूटे दिल के टुकड़े सजा कर नहीं रक्खे जाते, 


एक दो बेवफाई के इल्ज़ाम हों तो चलता है मगर

अक्सर मिले धोखे के गम छिपा कर नहीं रक्खे जाते,


एक दो महबूब के सितम हों तो चलता है मगर

नासूर बन चुके जख़्म सीने से लगा कर नहीं रक्खे जाते,


एक दो कभी शराब के जाम हों तो चलता है मगर

हर शाम मधुशाला जाने के चर्चे दबा कर नहीं रक्खे जाते । 


~ अम्बुज गर्ग

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