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शुरू करो अभियान

Amar DixitAmar Dixit December 27, 2022
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सुनो जन का अश्रव्य दारूण गान।

जहाँ पहुंचे न ज्योति रवि की, वहाँ करो प्रस्थान।।

जो वांछित, असहाय , अकिंचन, नीरस जिनका संसार।

जो निष्कासित मुख्य पटल से, उनमें भर दो प्राण।। 

जहाँ पड़ी न विभा प्रगति की, तमस छत्रछाया अनंत में।

अरुण, सुधाकर जिनको प्रतिदिन, लागे एक समान।।

जहाँ भाग्य की तीक्ष्ण तरंगें, अनुपस्थित बारह मास ।

जिनके मन-मस्तिष्क पर अंकित अपयश और अपमान।।

चलो पथिक, उस ओर मुड़ो, वहाँ जहाँ न हुआ प्रभात।

देने को उन दृगों को दृष्टि, अधरों को मुस्कान।।

परिवर्तित हो दिशा रश्मि की, प्रेम, करुणरस और श्रृंगार।

तरुण- जोश प्रफुल्लित मन से, शुरू करो अभियान।।

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