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जब भी तेरी बात चली है...।


आँखें नम हो जातीं मेरी जब भी तेरी बात चली है।

जीवन के बेस्वाद सफर में यादें तो मिसरी की डली हैं।

जब भी क़ोई मीत पुराना पहचाना सा जाना -जाना।

बात हुई तो सबसे पहले जिक्र करें तेरा अफसाना।

कहीं ना क़ोई फर्क पड़ा है यादें ताज़ा और भली हैं....।

भूली बिसरी याद याद संजोये सिसके राह गली चौबारे।

जहाँ गया बस चर्चा तेरी घर-घर -सबके द्वारे -द्वारे।

सारा शहर उदास हो गया जब भी तेरी बात चली है....।

जबसे गए यहाँ से तुम तो मुड़कर एकबार ना देखा।

किस दुनिया में कैद हुए तुम किसने खींची लक्ष्मण रेखा?

जब भी उन गलियों से गुजरे 'अमर' तेरी कमी खली है....।

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