दर्मियां's image
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तुम मेरे दरमियान ऐसे हो,

कोई खंजर के म्यान जैसे हो।


है छाई वो इस क़दर मुझपर,

धरा पर आसमान जैसे हो।


रोज़ लिखता हूँ,याद करता हूँ,

कि मेरा इम्तिहान जैसे हो।


सुबह की आरती हो,पूजा हो,

शाम की तुम अज़ान जैसे हो।


न कुछ आरज़ू रही है पाने की,

तुम्हें पा कर इत्मिनान जैसे हो।


अब और क्या मांगे ख़ुदा से,

तू मेरा आखिरी अरमान जैसे हो।


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