पल दो पल का साथ's image
Poetry2 min read

पल दो पल का साथ

Aman SinhaAman Sinha April 5, 2022
Share0 Bookmarks 32 Reads0 Likes

बोल जो हमने लिखे थे गीत तेरे हो गए

साथी मेरे जो भी थे सब मीत तेरे हो गए


वो हया थी या भरम था हम थे जिस पर मर गए

आज भी हम सोचते है क्या ख़ता हम कर गए


चाह थी हंसी की हमको आंसुओ से भर गए

पास थे मंज़िल के अपने गुमशूदा तुम कर गए


एक तेरी खातिर हमतो इस जहाँ से लड़ गए

रस्मों रिवाज़ तोरे हद से हम गुज़र गए


क़तार लम्बी थी मगर उसमे अपना भी नाम था

दीवानो में सबसे ऊपर अपना ही मुकाम था


हम थे बेसब्र हमको इश्क़ का गुमान था

चांदी के सिक्कों पे चलना तेरा भी अरमान था


साथ न छोड़ेंगे तेरा खुदसे वादा कर गए

होश में थे तुम मगर हालात पर मुकर गए


चैन, करार, सुकून सब साथ अपने ले गए

आंहे भरते रह गए हम किसी और के तुम हो गए


तुम थे बेखबर हमसे तुमको न एहसास था

तुम गए तो साथ अपने मेरी रूह को भी ले गए


फिज़ा थी ग़मगीन और दर्द का माहौल था

अश्क तुमने रख दिए और मुस्कान लेकर चल गए


जीत की ख़ुशी नहीं न हार का है ग़म कोई

हंसते थे जो नैन मेरे कर गया है नम कोई


सबसे छुपा के नज़रे तूने जो बुलाया था

होंटों से कहा नहीं कुछ इशारे से बताया था


गर मिलो तुम कहीं राह में चलते हुए

हाथ थामे हमसफ़र का बात यूँ करते हुए


देखना मगर कभी तुम जानना हमे नहीं

एक अतीत था मैं भी बोलना कभी नहीं


हम चले थे ये मान की ठोकरे ना खाएंगे

चाहे जो भी हो अंजाम दिल को तो लगाएंगे


वो चाहे ना चाहे है किसे परवाह लेकिन

हम अपना हाल-ए- दिल तो जरूर बताएंगे 









No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts