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किराये का मकान

Aman SinhaAman Sinha June 27, 2022
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दीवारें हैं छत हैं

संगमरमर का फर्श भी

फिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगता


चुकाता हूँ

मैं इसका दाम, हर तारीख पहली को

लेकिन फिर भी यहाँ मुझको, 

वो अपनापन नहीं मिलता


दीवारें साफ रखता हूँ, 

धीमी आवाज रखता हूँ

बच्चों के खिलौने से ज़रा नाराज रहता हूँ


कोई खट-खट ना हो जाए

कोई खट-पट ना हो जाए

ज़रा सी बात पर कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए


यहाँ है सब

कमरे, रसोई, झरोखे कई सारे

मगर खुला वो अपना आँगन नहीं मिलता


पड़ोसी है यहाँ भी पर

सब गुमसुम से रहते हैं

खुल के जो अपना ले वो दामन नहीं मिलता






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