The Kashmir Files's image
Share0 Bookmarks 22 Reads0 Likes
कब तक जले, 
घर छोड़ कब तक चले,
तन जाती बंदूकों के सामने
आंखें फट जाती है
देख ये बर्बर जलजले

धीरे धीरे सबने काटा है 
कहा कभी ऐसे किसी ने
दुख बांटा है

तीन दशकों से इंसाफ़ मांग रहे
हालात सुन सब भाग रहे
किसी ने है हिम्मत दिखाया
कश्मीर को कश्मीर है बताया..

ये संहार है
अपनों की हार है
क्रूरता को है बर्फ़ में दफनाया गया
खुद को ख़ुद के घर से भगाया गया

इज्जतें नीलाम हुई 
हत्याएं सरेआम हुई 
खून पीने की आदतों से
खून भी बदनाम हुई ...

~अमन

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts