बिहार's image
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जब चलऽ ली अपन घरवा से
दुसर शहरवा, की कमाएम
हमरा अपन गउवा याद आइल
सोचली फिर की 
सांझिये के रोटियां कहां से लाएम।।

बाबू के दिहारी से 
भूखवा ना मिटे हो
आ ना चलाएम देहवा ता
सेठवा करजावा ला पकड़ के पीटे हो।।

अंखियां में हमनी के भी लाज़ हऽ
आ हमर घर बिहार हऽ
सब केहू कहलस बाहर जाए के ना पड़ी
लेकिन हमनी जानेली ई नेतवा सबन के चमत्कार हऽ

गुजरात बनइली , हमनिए बनइली महाराष्ट्र
आ हमनी खेलत रहली कास्ट कास्ट
अब बदली ता कब ‌बदली ई राज्यवा के दशा
जब क़हर क़हर के सांसवा हो जाई लास्ट

~अमन

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