रूह- ए- इश्क़'s image
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 हों पास हर पल ये जुरूरी; थोड़ी ना होता है

तक़रीब-ए-विसाल-ए-यार ही इश्क़; थोड़ी ना होता है, 

आरज़ू-ए-वस्ल ही को मुकम्मल इश्क़; समझने वालों,

रूह-ए-इश्क़ में ये रिवाज थोड़ी ना होता है, 


~" अश्क कवि "

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