गुरु's image
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अपने कर्मो से शिखर तक ले जाने का

जिसके पास होती है क्षमता

वे ही होते हैं शि.क्ष.क (शिखर क्षमता कर्म)


हमारे अंदर के

गुणों से रूबरू कराने

वाले होते हैं गुरु।।

इक छोटी सी रेखा से

करते हैं हमारे जीवन शुरू।।

वे हमे लक्ष्य भेदना

सीखते हैं।।

हम कला तो वे कलाकार हैं

अपने कर्मो से देते हममें आकार हैं

वे वो शिल्पकार हैं।।

जो हमारी क्षमता को जानकर

गढ़ते नई पहचान हैं।

गुरु बिना क्या राम, कृष्ण,

राजा हरिश्चंद्र होते यों महान।

गुरु बिन बरदराज भी न

बनता यों संस्कृत विद्वान ।

यदि गुरु न हो इस जीवन में

कौन सिखाए दिव्य ज्ञान।।

तो इसलिए सिर्फ आज ही नहीं

हम करते हैं उन्हें

प्रतिदिन शत शत प्रणाम।।


'आलोक अनंत'

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