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वीरान सा हो गया सारा शहर मेरे लिए

aktanu899aktanu899 March 24, 2022
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वो इक शख्स क्या गया मेरी गली से

वीरान सा हाे गया सारा शहर मेरे लिए।


जब से बिछड़ा वो बीच राह मुझसे अचानक

चल रहे हैं पांव, पर खत्म सा हो गया सफर मेरे लिए।


दिल के घर के कोने कोने में बसी हैं उसकी यादें

पर वीरान सा हो गया है जैसे अब ये घर मेरे लिए।


दुनिया की निगाह है अब भी उनकी हर एक बात पे

कभी गिरकर उठती,उठकर गिरती थी जिनकी नजर मेरे लिए।


मुद्दतें हुई उनसे बिछड़े,मगर उनकी गली की राह न छूटी

जानता हूं, वो लौटकर इक दफा आयेगे इधर मेरे लिए।


तेरे साथ जो गुजरी, जैसे कोई ख्वाब था झिलमिल सा

किसे पता था इक रोज वो बन जायेगा खबर मेरे लिए।


वो जो तुझसे मिलना ,बिछड़ना था ऐ हमदम

पता कहां था,कर जायेगा क्या असर मेरे लिए।


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