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शब्दों की पात्रता को,

जब हम तौलने लगते हैं व्यक्तियों की पात्रता से

तब कई बार हमें होती है गहरी निराशा

व्यक्ति कुटिल हो सकते हैं,झूठे हो सकते हैं,

छुपा सकते हैं,

छद्म आवरणों में,

अपनी भावनाएं, कामनाएं, वासनाएं ,कुंठाएं,

छुपे हुए द्वेष , दबी हुई घृणाएं,

अपने दुख अपनी वेदनाएं

और भी बहुत कुछ,

पर शब्द तो शब्द होते हैं

बिना किसी आवरण के

वही कहते हुए जो उन्हें कहना है।

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