चुपचाप चले जाना's image
Poetry1 min read

चुपचाप चले जाना

aktanu899aktanu899 December 1, 2022
Share0 Bookmarks 87 Reads0 Likes

कई बार,

चुपचाप विदा लेनी पड़ती है ,

वहां से भी ,

जो जगह बहुत प्रिय हो,

जहां से जाने का

जरा भी मन न हो,

पर शायद वहां और रहना

संभव ही नहीं रह जाता,

बस चले जाना ही

सबसे श्रेयस्कर होता है,

उन जगहों से ।


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts