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मंथरा जो दीखाती है कैकई को वही नजर आता है,

गलतफहमियां ज्यादा हो तो झूठ भी उजाले सा नजर आता है,

सच ही है ये बात अपनो से हार कर व्यक्ति

अक्सर खामोश हो जाता है।

                   आकाश पांचाल

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