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ज से ज़िन्दगी

AKIB JAVEDAKIB JAVED October 7, 2021
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अंतर्मन से अपने जब कोई आवाज सुनो

जिंदगी के सफर में बेसबब निकल पड़ो


किसी रोज किसी सफर में जब हम निकल पड़े

परेशान भीड़ में हमें लोग ऐसे मिलते चले गये


हर रोज तमाम लोग ऐसे दुःख से मारे हुए

अनगिनत सवाल,अपने हाल में ही छोड़े हुए


बिना कुछ कहे, हमसे भी यूँ मिलते चले गए

हमे हर रोज जिंदगी से एक नए सवाल मिलते चले गए


कोई फटे-हाल जिंदगी जीने को मजबूर सा हो गया

कोई जिंदगी के बेतरीन स्वाद चखते चला गया


कोई खुदा की हर नेमत पाने के बावजूद,

हमेशा खुदा पर ही अनगिनत सवाल किया


कोई अपनी बदहाली पर खुश हो कर जिया

कोई ऐशो-आराम करते हुए परेशानियों में जिया


हर रोज हर सड़क पर एक नई सीख मिली

जिंदगी को जीने की हमे एक नई राह मिली


हासिल रहा ना कुछ भी, फिर भी हमे गुमान रहा

किसी के पास कुछ ना होते हुए भी, सब कुछ रहा


लबो पर किसी के अब एक हँसी उधार दो

किसी से दो चार बाते करके उसके गम उधार लो


चलना है तुझको,ऐसे ही सफर में कोई

जिंदगी के सफर में हमेशा खुशियाँ बिखेर दो।।


-आकिब जावेद


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