मां-बाप's image
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एक की मिट्टी एक का ताप|
यूं मुझमें बसते मेरे मां-बाप||

हाल पूछना यूँ फलदाई, 
ज्यों किसी मंत्र का लाखों जाप|

दुख में खुद आगे आते हैं
गर, सुख में भूलूं वे करते माफ||

उनकी मुस्कान देती आशीष 
व उनकी पीड़ा बन जाती शाप||

तू उनकी सेवा करता रह 
सच होंगे सपने अपनेआप||

संतानों को वही स्वर्ग है,
जिन संग रहते हैं मां-बाप||

उतनी दूर तीर बनकर जाएगा
जितना तनेंगे बनकर वे चाप||

गण से गणपति बना दे,
सम उनका फेरा धरा की माप|

पुण्य उनके वचन पालना,
उनकी अवज्ञा जैसे हो पाप|

धर्म बदलते ईश्वर बदले, 
पर, बदल ना सकता तू मां बाप||
-अजयसिंह गौतम 9300280390

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