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मैं भी बना हूं मोम का

जुड़ा हूं मोह के धागे से

व्यवहार से कठोर सही

पर भाव शून्य नहीं हूं मैं

तकदीर में मेरे जलना है

अंधकार से लड़ना है

तुम्हारे सुनहरे कल के लिए

मुझे आज पिघलना है

बहुत घनी है यह रात्रि

पर मैं इससे टकराऊंगा

खुश हूं यह सोचकर

इस कालिमा को मिटाऊंगा

मैं‌ तो जल जाऊंगा

पर उम्मीदों का प्रकाश फैलाऊंगा

कल जब होगी सुबह तुम्हारी

मैं यहीं पिघला नजर आऊंगा।

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