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मेरे गुणों को तराशा

मुझे अवगुणों से उबारा

मेरे जीवन को संवारा

मुझे दिखाया पथ न्यारा

करता हूं तुम्हारा गुणगान

हे गुरुवर, तुम्हें प्रणाम।

हे गुरुवर, तुम्हें प्रणाम।।


मैं तो था बस मिट्टी

तुमने मूर्ति बनाया

अपने ज्ञान के तपन से 

मुझको कुंदन‌ बनाया

करता हूं तुम्हारा गुणगान

हे गुरुवर, तुम्हें प्रणाम।

हे गुरुवर, तुम्हें प्रणाम।।

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