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मिथ्या राज

Ajay JhaAjay Jha October 16, 2022
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मिथ्या के विसतृत प्रचार में
अब सत्य दुराचार है
भ्रष्ट  हमारे  मनतन्त्र सखे
क्या विचार  क्या आचार है।


सब भाव श्रोत रुग्न 
और दुर्भावना परिपूर्ण  है
उद्वेग और आक्रन्त से
बस अन्त हि सम्पूर्ण  है।


अजय झा **चन्द्रम्**



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