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जीवन की प्यास

Ajay JhaAjay Jha October 2, 2022
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हम प्यासे हैं पीने वाले
पीने का सुख जानते हैं
पैदा हो कर जो सुधा पिया
उस मां का ऋण पहचानते हैं ।

दादी नानी कि लोरी में
चांद देश कि कटोरी में
अब भी ज़िद पर कुछ ठानते हैं
चंदा को मामा मानते हैं।

वो जोश उमङ मे खेल-खेल
भरी दुपहरी झेल-झेल
कल पर कतार लगाकर
प्यास कि आस को जानते हैं ।

किशोरावस्था मे पहुंच हमने
पथिको कि प्यास को जाना
कवियों कि रमनीय दुनियां में
अलियो कि प्यास को माना।

बच्चन साहब कि कविताओं में
हुम भी साकी पर खूब लुटे
पीने का चस्का ऐसा लगा
अब शायद इसकी  लड़ी टूटे ।

मित्र मंडलियों में रहकर
एक और पेय साथी पाया
चाय लोग कहते उसको
जो कितनो को मुझ तक लाया।

अपनी साकी का पता नही
बच्चन की साकी को छेड़ता हूं
पीने-पिलाने की दुनिया में
जीवन का दर्शन हेरता हूं।

पीने की जो रस्म है ये
मृत्यु तक साथ भी जाती है
गंगाजल-तुलसी दो घूंठ पिला
भू-सागर पार कराती है।

अत: जीने वालो सुनो
पीने वालों का सम्मान करो
उनको पीते देख सहर्ष
अपने होठों को तर करो।

अजय झा **चन्द्रम्**




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