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हर मन तिरंगा

Ajay JhaAjay Jha August 14, 2022
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गर्व और अभिमान से, मस्तक ये उठना चहिये
हर पर्व से परे, राष्ट्र-पर्व रहना चाहिए।

हो सहस्र मतभेद पर, इक जोड़ रहना चाहिए
देश कि हि जड़ों पर, विविध शाख फलना चाहिए।


मै-तुम्हारा, तुम-मेरे, सब एक होने चाहिए
भाव के बहाव मे भी, हिन्दुस्तान बहना चाहिए।

जो न समझे सत्य को, उसे इतिहास पढना  चाहिए
त्याग और बलिदान पूर्ण, वो काल देखना चाहिए।


मनाये जश्न-ए आज़ादी हम, पर भान रहना चाहिए
दिनकर कि "रोटी और स्वधीनता" का, मर्म  याद रखना चाहिए।

आएगा अमृतकाल तभी, जब हर मन तिरंगा लहरायेगा
राष्ट्र-पर्व से भी परे, वो देश-राग गाएगा।


अजय झा **चन्द्रम्**

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