Bahut se raaz seene men gade hain's image
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बहुत से राज़ सीने में गड़े हैं

सो इतनी चुप्पियां ओढ़े खड़े हैं


ये खिड़की बंद हो जाएगी हम तक

बहुत पीछे से लाइन में खड़े हैं


हमारा ज़ब्त टूटा जा रहा है

और आंसू हैं कि ज़िद पर ही अड़े हैं


हमें सोने नहीं देती है उलझन

कई घंटों से बिस्तर पर पड़े हैं


समझ आता है हम को दुख बड़ों का

हम अपने घर के बच्चों में बड़े हैं

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