आख़िरी विदायी's image
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सुनो ज़रा तुम 

जानती हूँ तुम व्यस्त होगे 

मगर आना जब मेरी 

अंतिम यात्रा पे 

तो आँखों में आँसु रख कर 

मुझे विदा ना करना 

जिस तरह मेरे चेहरे को देख हंसते थे 

ठीक उसी तरह मुझे हँसते विदा करना 


आना जब तुम मेरी 

आख़िरी विदायी पे 

तो वो अपनी लिखी सारी कविताएँ 

ले आना , 

जिसे तुम मुझसे छुपा कर रखते थे 

अब और मत छुपाना उसे 

पढ़ देना वो सब कुछ 

जो तुम बोल नहीं पाए मुझसे 

मेरे जीते जी 


आना जब तुम मेरी 

आख़िरी विदायी पे 

तो अग्नि को साक्षी मान कर 

अपने प्यार का इज़हार कर देना 

मैं बेशक़ जवाब नहीं दे पाऊँगी 

मगर तुमको मेरा जवाब मालूम होगा 


आना जब तुम मेरी 

आख़िरी विदायी पे 

तो वक्त लेकर आना , 

अपने हाथों में मेरे हाथ के सिवा 

कुछ और ना रखना 

वक्त की बंदिश में 

मुझे जल्दी विदा ना करना 

जानती हूँ तुम्हें जल्दी रहती है 

हमेशा जाने की  


सुनो जब आना तुम 

मेरी आख़िरी विदायी पे 

तो अपने संघ अपनी प्रेमिका को ना लाना 

मैं खुद आग में जल रही होऊँगी 

मुझे और ना जलाना ...

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