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वक़्त के आग़ोश में....

आचार्य अमितआचार्य अमित November 25, 2022
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कुछ हवाएं रुख बदल रही है
कुछ परिंदों ने भी आशियाँ बदला है
कुछ उन्मुक्त गगन के बदले है तेवर
कुछ अजनबी मुसाफिरों ने फिर अंदाज़ बदला है
एक नाव ख्वाहिशों की फिर हिचकोले ले रही है
जाना है किस और कोई नही जानता फिर
कुछ नदियों के मुहाने पर समुंदर सा तूफान सम्भला है
यह जज़्ब हो रही सिसकियां वक़्त के आग़ोश में
बेवज़ह ही सिसक रही है जाने किसके शौक़ में
आडम्बर तो नही है फिर न जाने यूं लगता है मानो
आज फिर किसी दीवाने ने किसी की ख़ातिर 
आज फिर अपना खोखलें इश्क़ में ईमान बदला है.......
                                             आचार्य अमित

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