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देह पर उकेरी कविताएँ

अबोध मनअबोध मन May 4, 2022
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कुछ रक्तिम

कविताओं के

अक्षर उकरे देखे

मैंने उसकी

देह पर,

पवन वेग ने

अपने स्पर्श से

पल भर को

उसके तन से

आँचल को

विचलित कर

दिया था..!

कविताएँ जिन्हें

किसी प्रेमी ने

मात्र स्पर्श से

नक्काशी की

तरह उकेरा होगा,

या फिर किसी

दानव रूपी मनुज

ने उसे पत्थर

समझ पीड़ा की

पराकाष्ठा तक

छेनी हथौड़ी से

अपना हुनर

आज़माया होगा।


© फ़क़त’फरीदा’ ✍


अबोध_मन//फरीदा

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