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"प्रकृति और कर्म "

abhishek bhartiabhishek bharti June 16, 2020
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हे नर तू निराश न हो!

जैसे हर काली रात के बाद सुनहरा दिन आता है, वैसे ही तेरे दुःख के बादल भी छट के खुशियों की हरियाली लहरायेगी...

यही तो इस पावन प्रकृति का अदभुद चमत्कार है, तो निराशा को छोड़ के अपने कर्म की ओर गमन करो

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