तत त्वम असि's image
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क्या ढूंढ रहे हो पथिक,
कौन गली को जाना है।
विचरण कर लो हर राह मगर,
अंत इसी डगर पर आना है।।
वो सागर की लहर नहीं तुम,
तुम तो अनंत छोर हो।
ये दृष्टि का मायाजाल नहीं तुम,
तुम तो सहजता का सिरमौर हो।।
स्वप्न का रहस्य नहीं तुम,
अहंकार की बहस नहीं तुम,
काल के चक्र की दूरी भी तुमसे,
प्रलोभन भरे इन संसार में
कण कण की धुरी भी तुमसे।।
वो निस्वार्थ भाव का कर्म तुम,
हर मधुर ध्वनि का ॐ मर्म तुम।
हर भक्त में बसी सहस प्रीत तुम,
धर्म-सत्य की असल रीत तुम।।
                                  
                                         अभिमन्यु सिंह

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